राम मंदिर में गंगाजल छिड़कने पर बवाल, कांग्रेस ने लगाया बीजेपी पर दलित विरोधी होने का आरोप
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| टीकाराम जूली और ज्ञानदेव आहूजा की फोटो (फोटो- मलूक लेब) |
"मैं भगवान श्री राम के एक मंदिर के अंदर गया, वहा मंदिर का नवनिर्माण हुआ था. उन लोगों ने मुझे बुवाला था. उसके बाद बीजेपी ऐर आरसस के लोंग जाते हैं और गंगा जल छिड़कर उसकों पवित्र करने की बात करते हैं. मैं उन लोगों से पूछना चहाता हूं हमारी क्या ओकात है?. बाबा भीम राव अंबेड़कर ने जो संविधान के तहद हमे औकात दी है क्या वो हमारी औकात हैं. मैं यह बात इन लोगों से पूछना चहाता हू"
यह कहना हैं कांग्रेस राजस्थान विधायक टीकाराम जूली का जो रामनवमी के दिन राम के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में शामिल होने के लिए अलवर मे राम के एक मंदिर मे गए थे. जिसके बाद मंदिर को गंगा जल छिड़कर पवित्र करने का मामला सामने आया हैं
https://x.com/INCMumbai/status/1909906445925335164
पूरा मामला क्या है?
कांग्रेस विधायक और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली रामनवमी के अवसर पर एक मंदिर में राम के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में शामिल होने गए थे. उनके वहां जाने के बाद, भाजपा के वरिष्ठ नेता श्री ज्ञानदेव आहूजा ने उस मंदिर में गंगाजल छिड़कर पवित्र किया. ज्ञानदेव आहूजा ने रामनवमी के दिन कहा कि टीकाराम जूली हिदूत्व का विराधी है और वह मंदिर गया जिस कारण मंदिर अपवित्र हो गया हैं. मैं आज मंदिर नही जाकर के कल जाऊंगा और इनके जो अपवित्र चरण वहां पड़े है शालीमार की जनता को ले जाकर वहां गंगा जल छिड़क कर के भगवान श्री राम का पुजन करुगां.
इस मामले ने काफी विवाद खड़ा किया है, क्योंकि इसे कुछ लोगों ने दलित समुदाय से आने वाले टीका राम जूली के प्रति अपमानजनक और भेदभावपूर्ण कृत्य के रूप में देखा.
विपक्ष के नेता क्या बोले
कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दलों की इस मामले पर प्रतिक्रिया दी हैं, कांग्रेस नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा-'गंगाजल छिड़कने की घटना दलितों के प्रति भाजपा की दुर्भावना को दर्शाती है, 21 वीं सदी में ऐसी संकीर्ण मानसिकता एक सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं है, इसकी जितने कड़े शब्दों में निंदा की जाए वह कम है, क्या राजस्थान के मुख्यमंत्री एवं भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष अपने वरिष्ठ नेता के इस व्यवहार से सहमत है?, क्या इस घृणित कृत्य के लिए भाजपा अपने नेता पर कार्रवाई करेगी'?
गोविंद सिंह डोटासरा (प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष): डोटासरा ने इसे दलितों, किसानों, महिलाओं और मजदूरों के प्रति भाजपा की नफरत का सबूत बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा का दिल दलितों के प्रति नफरत और जलन से भरा है, और जनता इसका जवाब देगी.
राहुल गांधी (कांग्रेस नेता) ने इसे "मनुवादी सोच" का प्रतीक बताया और भाजपा पर सामाजिक समानता के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया. उन्होंने
कहा हमारे नेता टीकाराम जूली जी राजस्थान के CLP लीडर हैं, वो मंदिर गए तो BJP के नेताओं ने उस मंदिर को गंगाजल से धुलवा दिया. बीजेपी के लोग एक दलित व्यक्ति को मंदिर में जाने नहीं देते और अगर वह जाता है तो मंदिर को धुलवाते हैं. ये हमारा धर्म नहीं है, क्योंकि हमारा धर्म किसी के साथ भेदभाव नहीं सिखाता है। हमारे धर्म में सभी के साथ समानता और सम्मान की बात कही गई है.
https://x.com/i/status/1909958528607088670
इस विवाद पर टीकाराम जूली क्या बोले
"भाजपा की मानसिकता ये है कि वो मेरे दलित होने के कारण मंदिर जाने पर गंगाजल से मंदिर धुलवाने की बात कह रहे हैं"
कांग्रेस नेता टीकाराम जूली ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि "भाजपा के वरिष्ठ नेता श्री ज्ञानदेव आहूजा का बयान भाजपा की दलितों के प्रति मानसिकता का परिचायक है। मैंने विधानसभा में दलितों की आवाज उठाते हुए छुआछूत के विरुद्ध अभियान चलाने की बात कही थी पर भाजपा की मानसिकता ये है कि वो मेरे दलित होने के कारण मंदिर जाने पर गंगाजल से मंदिर धुलवाने की बात कह रहे हैं."
टीकाराम जूली कहते हैं "क्या भाजपा दलितों से इतनी नफरत करती है कि हमें पूजा पाठ करते भी नहीं देख सकती है? क्या भगवान पर केवल भाजपा नेताओं का अधिकार हो गया है? मुख्यमंत्री जी एवं भाजपा प्रदेशाध्यक्ष को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वो दलितों के मंदिर जाने पर गंगाजल से मंदिर धुलवाने के बयान का समर्थन करते हैं ?"
https://x.com/TikaRamJullyINC/status/1909204045669036373
अगस्त 2022 मे अलवर मॉब लिंचिंग की घटना पर आहूजा ने कहा, "यह पहली बार हुआ कि उन्होंने एक मारा, हमने पांच मारे. मैंने अपने कार्यकर्ताओं को छूट दे रखी है, मारो, हम जमानत भी करवा देंगे।" यह बयान एक समुदाय विशेष को निशाना बनाते हुए देखा गया.
साल 2016 में जेएनयू जब दिल्ली के जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय में कथित तौर पर 'देश विरोधी नारे' लगाने को लेकर विवाद हुआ था. इस दौरान आहूजा ने JNU के बारे में कहा था कि यहां हर रोज़ 3 हज़ार कंडोम्स का इस्तेमाल होता है. उस वक़्त ज्ञान देव आहूजा के इस बयान की काफ़ी आलोचना भी हुई थी.
इतना ही नहीं, आहूजा ने JNU को नशे का अड्डा बताते हुए कहा था, ''JNU के छात्र नशे के आदी हैं और परिसर में पाए जाने वाले एल्युमीनियम फॉयल का इस्तेमाल नशा करने के लिए किया जाता है''
ज्ञानदेव आहूजा "टीकाराम जूली" विवाद में अपने बचाव में क्या बोले
ज्ञानदेव आहूजा (पूर्व भाजपा विधायक) ने अपने कृत्य का बचाव करते हुए कहा कि उनका इरादा जातिगत भेदभाव का नहीं था, बल्कि वे कांग्रेस नेताओं के मंदिर आने के खिलाफ थे, जिन्होंने उनके अनुसार, भगवान राम की सत्ता को नकारा था। उन्होंने दावा किया कि वे दलित समर्थक हैं और उनका विरोध केवल कांग्रेस की विचारधारा के खिलाफ था.
भजन लाल शर्मा (मुख्यमंत्री, राजस्थान) की ओर से इस घटना पर कोई प्रत्यक्ष बयान सामने नहीं आया, लेकिन जूली और गहलोत ने उनसे स्पष्टीकरण और कार्रवाई की मांग की
भाजपा नेतृत्व: भाजपा ने आहूजा को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया और उन्हें तीन दिन में जवाब देने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया। पार्टी ने इसे अनुशासनहीनता माना और कहा कि इससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा.

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